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Nipah Virus Symptoms in Hindi

निपाह वायरस: एक घातक संक्रमण पर विस्तृत जानकारी निपाह वायरस: एक घातक संक्रमण पर विस्तृत जानकारी निपाह वायरस (Nipah Virus) एक अत्यंत घातक और जानलेवा वायरस है जो मुख्यतः जानवरों से मनुष्यों में फैलता है। यह वायरस पहली बार 1998 में मलेशिया में पहचाना गया था और तब से यह कई बार भारत सहित अन्य देशों में प्रकोप का कारण बन चुका है। इतिहास निपाह वायरस की पहचान सबसे पहले 1998 में मलेशिया के निपाह नामक गांव में हुई थी। यह वायरस मुख्यतः सूअरों और चमगादड़ों से जुड़ा पाया गया। भारत में इसका पहला प्रकोप 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में हुआ था, जिसमें कई लोगों की मृत्यु हुई थी। इसके बाद 2007 में फिर से पश्चिम बंगाल में और 2018 से केरल में नियमित रूप से इसके मामले सामने आए हैं। प्रसार का तरीका फल खाने वाले चमगादड़ (Pteropus species) इस वायरस के प्राकृतिक वाहक होते हैं। संक्रमित जानवरों (जैसे सूअर) के संपर्क में आने से यह वायरस मनुष्यों में फैल सकता है। संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में आने से भी यह वायरस फै...

Ekadashi Vrat 2026

Ekadashi Vrat 2026: तिथि, महत्व, नियम, कथा और संपूर्ण मार्गदर्शन

एकादशी व्रत 2026: तिथि, महत्व, नियम, कथा और संपूर्ण मार्गदर्शन

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का स्थान अत्यंत पवित्र माना गया है। यह व्रत हर महीने दो बार—शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। वर्ष 2026 में कुल 24 एकादशी आएँगी। एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम साधन माना गया है। ऐसा विश्वास है कि इस व्रत को रखने से मनुष्य के पाप नष्ट होते हैं, मन शुद्ध होता है और जीवन में सुख‑समृद्धि आती है।

इस विस्तृत ब्लॉग में आप जानेंगे—

Welcome to Gyaninilima Blog Par

  • एकादशी व्रत क्या है
  • एकादशी का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व
  • 2026 की सभी एकादशी तिथियाँ
  • व्रत की विधि
  • क्या खाएँ और क्या न खाएँ
  • एकादशी की पौराणिक कथा
  • लाभ और सावधानियाँ
  • अंत में महत्वपूर्ण FAQ

एकादशी व्रत क्या है?

एकादशी, चंद्र मास के अनुसार, हर पक्ष की 11वीं तिथि को कहा जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। शास्त्रों में कहा गया है कि एकादशी के दिन उपवास करने से मनुष्य के भीतर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है।

एकादशी को “हरिवासर” भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है—भगवान हरि का दिन। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, नाम‑स्मरण और व्रत का विशेष महत्व होता है।

एकादशी व्रत का महत्व

धार्मिक महत्व

  • भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • पापों का नाश होता है और मन शुद्ध होता है।
  • मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • घर में शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
  • ईश्वर पर श्रद्धा और भक्ति बढ़ती है।

वैज्ञानिक महत्व

  • उपवास शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है।
  • पाचन तंत्र को आराम मिलता है और पाचन शक्ति बेहतर होती है।
  • मानसिक एकाग्रता और फोकस बढ़ता है।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार हो सकता है।
  • अनुशासित जीवनशैली को बढ़ावा मिलता है।

एकादशी व्रत 2026 की पूरी सूची

जनवरी 2026

  • पौष कृष्ण एकादशी – 2 जनवरी
  • पुत्रदा एकादशी – 17 जनवरी

फ़रवरी 2026

  • माघ कृष्ण एकादशी – 1 फ़रवरी
  • जया एकादशी – 16 फ़रवरी

मार्च 2026

  • फाल्गुन कृष्ण एकादशी – 2 मार्च
  • अमलकी एकादशी – 17 मार्च

अप्रैल 2026

  • चैत्र कृष्ण एकादशी – 1 अप्रैल
  • कामदा एकादशी – 16 अप्रैल
  • वैशाख कृष्ण एकादशी – 30 अप्रैल

मई 2026

  • मोहिनी एकादशी – 15 मई
  • ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी – 30 मई

जून 2026

  • निर्जला एकादशी – 14 जून
  • आषाढ़ कृष्ण एकादशी – 29 जून

जुलाई 2026

  • देवशयनी एकादशी – 14 जुलाई
  • श्रावण कृष्ण एकादशी – 28 जुलाई

अगस्त 2026

  • पवित्रा एकादशी – 12 अगस्त
  • भाद्रपद कृष्ण एकादशी – 27 अगस्त

सितंबर 2026

  • परिवर्तिनी एकादशी – 11 सितंबर
  • आश्विन कृष्ण एकादशी – 26 सितंबर

अक्टूबर 2026

  • पापांकुशा एकादशी – 11 अक्टूबर
  • रमा एकादशी – 25 अक्टूबर

नवंबर 2026

  • देवउठनी एकादशी – 10 नवंबर
  • मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी – 24 नवंबर

दिसंबर 2026

  • मोक्षदा एकादशी – 10 दिसंबर
  • पौष कृष्ण एकादशी – 24 दिसंबर

एकादशी व्रत कैसे करें? (व्रत विधि)

दशमी के दिन (तैयारी)

  • सात्त्विक भोजन करें, तामसिक चीज़ें जैसे प्याज‑लहसुन से परहेज़ करें।
  • मन को शांत रखें और गलत कर्मों से बचें।
  • जल्दी सोने की कोशिश करें ताकि अगली सुबह जल्दी उठ सकें।

एकादशी के दिन

  • प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
  • घर के पूजा स्थान में भगवान विष्णु और तुलसी की पूजा करें।
  • व्रत निर्जला (बिना जल) या फलाहार रूप में, अपनी क्षमता के अनुसार करें।
  • पूरे दिन हरि नाम जप, कीर्तन, भजन और धार्मिक पाठ का अभ्यास करें।
  • किसी जरूरतमंद की मदद या दान‑पुण्य अवश्य करें।

द्वादशी के दिन (व्रत पारण)

  • शास्त्रों में बताए गए पारण समय में ही व्रत खोलें।
  • पहले भगवान को भोग लगाएँ, फिर ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएँ।
  • इसके बाद स्वयं सात्त्विक भोजन ग्रहण करें।

एकादशी में क्या खाएँ?

फलाहार में शामिल कर सकते हैं

  • विभिन्न प्रकार के ताज़े फल।
  • दूध, दही, मठ्ठा।
  • साबूदाना (खिचड़ी या खीर)।
  • कुट्टू आटा (पूरी, पकौड़ी आदि)।
  • सिंघाड़ा आटा (हलवा, पूरी)।
  • भुनी या हल्की तली मूंगफली।
  • नारियल पानी, नींबू पानी (बिना नमक या सेंधा नमक के साथ)।

इन चीज़ों से बचें

  • सभी प्रकार के अनाज (गेहूँ, चावल आदि)।
  • दालें और सामान्य नमक।
  • मांसाहार और शराब।
  • प्याज और लहसुन सहित तामसिक भोजन।
  • बहुत ज्यादा तला‑भुना या मसालेदार भोजन (फलाहार में भी)।

एकादशी की पौराणिक कथा (संक्षेप में)

एकादशी की सबसे प्रसिद्ध कथा मुरासुर के वध से जुड़ी है। कहा जाता है कि बहुत समय पहले मुर नामक एक असुर देवताओं और ऋषियों को बहुत परेशान करता था। उसके अत्याचारों से त्रस्त होकर सभी ने भगवान विष्णु से रक्षा की प्रार्थना की।

भगवान विष्णु ने मुरासुर से भयंकर युद्ध किया। लंबे समय तक युद्ध चलने के बाद भगवान विश्राम के लिए बद्रीनाथ की एक गुफा में गए। तभी मुरासुर वहाँ भगवान पर आक्रमण करने पहुँचा। उसी समय भगवान विष्णु के शरीर से एक दिव्य तेजस्विनी शक्ति प्रकट हुई—एक सुंदर देवी।

उस देवी ने मुरासुर का वध कर दिया। भगवान विष्णु उस देवी से अत्यंत प्रसन्न हुए और उसे “एकादशी” नाम दिया। भगवान ने कहा कि जो भी मनुष्य श्रद्धा और नियमपूर्वक एकादशी का व्रत करेगा, उसके पाप नष्ट होंगे और उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी। तभी से एकादशी व्रत की महिमा स्थापित हुई।

एकादशी व्रत के लाभ

आध्यात्मिक लाभ

  • मन की शुद्धि और आत्मिक शांति मिलती है।
  • ईश्वर भक्ति और साधना में प्रगति होती है।
  • पापों के प्रायश्चित का मार्ग बनता है।
  • धार्मिक संस्कार मजबूत होते हैं।

मानसिक लाभ

  • तनाव और मानसिक बेचैनी में कमी आ सकती है।
  • एकाग्रता और फोकस बढ़ता है।
  • नकारात्मक विचारों से दूरी बनती है।
  • सकारात्मक सोच और धैर्य विकसित होता है।

शारीरिक लाभ

  • शरीर को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है।
  • पाचन तंत्र को आराम मिलता है और वह मजबूत होता है।
  • वजन नियंत्रण में सहायक हो सकता है।
  • संतुलित उपवास से शरीर हल्का और ऊर्जावान महसूस कर सकता है।

एकादशी में क्या न करें?

  • अनाज, दाल और चावल का सेवन न करें।
  • क्रोध, झूठ, चुगली और किसी का अपमान करने से बचें।
  • नशा, धूम्रपान या किसी भी प्रकार की व्यसन आदतों से दूर रहें।
  • अत्यधिक नींद या आलस्य से बचें।
  • देर रात तक अनावश्यक मनोरंजन में समय न व्यर्थ करें।
  • अनावश्यक विवाद या झगड़े से दूरी बनाए रखें।

एकादशी और तुलसी का संबंध

तुलसी को भगवान विष्णु की अत्यंत प्रिय मानी जाती है। एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को जल चढ़ाना, घी का दीपक जलाना और तुलसी के पास बैठकर मंत्र जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

मान्यता है कि तुलसी और शालिग्राम की संयुक्त पूजा से जीवन में सुख‑शांति, समृद्धि और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। इसलिए एकादशी व्रत के साथ तुलसी पूजन को अवश्य शामिल करना चाहिए।

एकादशी मंत्र

एकादशी के दिन इन मंत्रों का जाप करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति में सहायता मिलती है:

  • “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
  • “ॐ विष्णवे नमः”
  • “श्री हरि विष्णु नमः”
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निष्कर्ष

एकादशी व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक अनुशासित और संतुलित जीवनशैली का प्रतीक है। यह शरीर, मन और आत्मा को शुद्ध करने का माध्यम है। 2026 में आने वाली सभी एकादशियों का नियमित रूप से पालन करके आप अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि को आमंत्रित कर सकते हैं।

श्रद्धा, नियम और शुद्ध भाव से किया गया एक छोटा‑सा व्रत भी महान फल दे सकता है। इसलिए अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार एकादशी व्रत अवश्य अपनाएँ और भगवान विष्णु की कृपा के अधिकारी बनें।

Ekadashi Vrat 2026 – FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. 2026 में कुल कितनी एकादशी होंगी?

उत्तर: सामान्य रूप से एक वर्ष में 24 एकादशी होती हैं (हर महीने दो – शुक्ल और कृष्ण पक्ष में)। वर्ष 2026 में भी कुल 24 एकादशी व्रत पड़ेंगे। अगर किसी वर्ष अधिक मास या विशेष पंचांग परिवर्तन हो, तो संख्या 26 भी हो सकती है, लेकिन सामान्य गणना के अनुसार 24 ही मानी जाती हैं।

Q2. क्या एकादशी पर पानी पी सकते हैं?

उत्तर: शास्त्रों में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन सभी लोगों के लिए निर्जला व्रत आवश्यक नहीं है। सामान्य एकादशी में आप अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार जल, फलाहार, दूध आदि ले सकते हैं। अगर किसी को बीमारी या कमजोरी है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही व्रत रखें।

Q3. क्या एकादशी पर दवाई ली जा सकती है?

उत्तर: यदि आप किसी रोग से पीड़ित हैं और नियमित दवाई लेनी पड़ती है, तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना ज़रूरी है। इस स्थिति में आप फलाहार व्रत रखते हुए दवाई ले सकते हैं। रोगी या बुजुर्ग पर कठोर उपवास थोपना उचित नहीं माना जाता।

Q4. क्या स्त्रियाँ एकादशी व्रत रख सकती हैं?

उत्तर: हाँ, स्त्रियाँ भी एकादशी व्रत रख सकती हैं और उन्हें पूर्ण अधिकार है। केवल गर्भावस्था, अत्यधिक कमजोरी या किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में डॉक्टर की सलाह के अनुसार व्रत की विधि में परिवर्तन किया जा सकता है।

Q5. यदि एकादशी भूल जाएँ तो क्या करें?

उत्तर: यदि आप किसी कारणवश एकादशी का व्रत भूल जाएँ या ठीक से न कर पाएँ, तो मन में अपराध‑बोध न रखें। भगवान भाव के भूखे हैं। अगली एकादशी को और अधिक श्रद्धा के साथ व्रत रखने का संकल्प लें और ईश्वर से प्रार्थना करें।

Q6. क्या एकादशी के दिन सोना नहीं चाहिए?

उत्तर: कुछ शास्त्रीय मतों में अत्यधिक सोने से मना किया गया है, क्योंकि यह दिन जप, ध्यान, पाठ और भजन के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। हल्का विश्राम या सामान्य नींद ले सकते हैं, लेकिन पूरा दिन आलस्य में बिताना उचित नहीं है।

Q7. एकादशी व्रत किस समय खोलना चाहिए?

उत्तर: व्रत पारण द्वादशी तिथि में, शास्त्रों में बताए गए समय के भीतर ही करना चाहिए। आमतौर पर सुबह के समय पारण किया जाता है, लेकिन इसके लिए अपने स्थानीय पंचांग या पंडित से पारण समय अवश्य पूछ लें।

Q8. क्या बच्चे भी एकादशी व्रत रख सकते हैं?

उत्तर: छोटे बच्चों पर कठोर उपवास थोपना उचित नहीं है, लेकिन उन्हें हल्का‑फुल्का व्रत, जैसे केवल फल या हल्का भोजन, कराने की आदत डाली जा सकती है ताकि उनमें धार्मिक संस्कार विकसित हों।

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